Time Sharing Operating System in Hindi | टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?

Hello दोस्तों इस लेख में हमलोग Time Sharing Operating System in Hindi के बारे में पढ़ने जा रहे है टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है, टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम कैसे कार्य करता है तथा इसके कौन कौन से फायदे और नुकसान होते हैं। इस आर्टिकल में आपकी इस टॉपिक से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी मिल जाएगी।

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?- Time Sharing Operating System in Hindi

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Time Sharing Operating System) एक ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जो कंप्यूटर के सभी उपयोगकर्ताओं के साथ समय साझा करता है। इस सिस्टम के तहत, कंप्यूटर के रिसोर्सेस जैसे कि CPU, मेमोरी और पेरिफेरल डिवाइसेस आवंटित किए जाते हैं ताकि सभी उपयोगकर्ता उन्हें उपयोग कर सकें। इस तरह के सिस्टमों का उपयोग विभिन्न जगहों पर किया जाता है जहां एक से अधिक उपयोगकर्ता साझा संसाधनों का उपयोग करते हैं, जैसे कि बैंकों, वित्तीय संस्थाओं, शिक्षण संस्थाओं आदि।

Time sharing operating system कैसे काम करता है?

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के सभी उपयोगकर्ताओं के साथ समय साझा करता है। इस सिस्टम में, Computer के रिसोर्सेस जैसे CPU, मेमोरी, पेरिफेरल डिवाइसेस आवंटित किए जाते हैं ताकि सभी उपयोगकर्ताएं उन्हें उपयोग कर सकें।

यदि कोई उपयोगकर्ता CPU का उपयोग कर रहा है तो बाकी उपयोगकर्ताओं को अपनी बारी का इंतजार करना होता है। जब उपयोगकर्ता CPU का उपयोग समाप्त करता है, तो सिस्टम अगले उपयोगकर्ता को आवंटित करता है। इस तरह, टाइम शेयरिंग सिस्टम एक समान तरीके से सभी उपयोगकर्ताओं के लिए रिसोर्सेस को साझा करता है और कंप्यूटर के उपयोग के दौरान समय का बेहतर उपयोग होता है।

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताएं

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम की कुछ मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • इस सिस्टम के तहत, सभी उपयोगकर्ता कंप्यूटर के साझा रिसोर्सों का उपयोग कर सकते हैं जिससे समय का बेहतर उपयोग होता है।
  • टाइम शेयरिंग सिस्टम संसाधनों को प्रभावी ढंग से व्यवस्थित करता है ताकि सभी उपयोगकर्ता अच्छी तरह से उन्हें उपयोग कर सकें।
  • इस सिस्टम के तहत, सभी उपयोगकर्ता कंप्यूटर के साझा संसाधनों जैसे कि प्रिंटर, स्कैनर आदि का उपयोग कर सकते हैं।
  • इस सिस्टम में, सुरक्षा उन्नतता की सुविधा होती है क्योंकि एक उपयोगकर्ता के डेटा को दूसरे उपयोगकर्ता के साथ साझा नहीं किया जाता है।
  • टाइम शेयरिंग सिस्टम उपयोगकर्ताओं को उनकी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार रिशोर्स शेयर करता है.

Time sharing operating system example

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं-

UNIX: यह सबसे लोकप्रिय और स्थिर टाइम शेयरिंग सिस्टम है। इसे सर्वर, वर्कस्टेशन, रूटर और समुदाय के साथ-साथ बहुत सारे सुविधाओं के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।

Windows NT: यह भी एक टाइम शेयरिंग सिस्टम है जो उन्नत रूप से विकसित किया गया है। यह सिस्टम विंडोज के कुल मिलाकर सर्वर वर्शन के रूप में उपलब्ध होता है।

Linux: यह एक ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है जो टाइम शेयरिंग सिस्टम के रूप में भी काम करता है। यह सबसे लोकप्रिय और स्थिर ऑपरेटिंग सिस्टमों में से एक है और सर्वर, वर्कस्टेशन, स्टॉरेज और सिक्योरिटी के लिए उपयोग किया जाता है।

Multics: यह दुनिया का पहला टाइम शेयरिंग सिस्टम था। इसे 1965 में विकसित किया गया था और इसके संचालन के लिए कंप्यूटर हार्डवेयर के साथ-साथ सॉफ्टवेयर की भी आवश्यकता थी।

Time sharing operating system के फायदे

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ फायदे निम्नलिखित हैं-

वर्गीकरण: टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम की सहायता से कई उपयोगकर्ताओं का उपयोग एक साथ किया जा सकता है जो विभिन्न विषयों या प्रक्रियाओं से संबंधित हो सकते हैं।

उपयोगिता: टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम की मदद से उपयोगकर्ताएं अपने समय का अधिक उपयोग कर सकते हैं और तेजी से और अधिक कार्य कर सकते हैं।

लोकप्रियता: टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम को बहुत से उपयोगकर्ताओं द्वारा अधिक लोकप्रियता मिली है क्योंकि यह सबसे बेहतर तरीके से संचालित होता है और अधिक संबंधित उपयोगकर्ता को बेहतर सेवाएं प्रदान करता है।

कम संपादक लागत: टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम संपादक लागत को कम करता है, क्योंकि कई उपयोगकर्ताएं एक साथ काम करते हैं और एक संपादक को एक ही समय में कई कार्यों का प्रबंधन करना पड़ता है।

Time sharing operating system के नुकसान

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ नुकसान हैं:

  • टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम की सुरक्षा कम होती है। क्योंकि कई उपयोगकर्ताएं एक साथ काम करते हैं, जिससे एक उपयोगकर्ता दूसरे उपयोगकर्ताओं के डेटा तक पहुंच सकता है।
  • टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में संगतता कम होती है क्योंकि अलग-अलग उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं के आधार पर उपकरणों को कॉन्फ़िगर करना पड़ता है।
  • टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का कार्य भार बढ़ता है जब उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ती है। इससे सिस्टम का प्रदर्शन धीमा हो जाता है।
  • टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम में उपयोगकर्ताओं को सामान्यतया उसी समय में प्रबंधित करना पड़ता है, जो उनके प्रबंधन को मुश्किल बना सकता है।

निष्कर्ष

इस लेख में हमने आपको टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानकारी दी हमे आशा है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी और यह आपके लिये मददगार साबित होगी। यदि आपको यह जानकारी पसन्द आयी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

FAQs

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Time Sharing Operating System) एक ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जो कंप्यूटर के सभी उपयोगकर्ताओं के साथ समय साझा करता है। इस सिस्टम के तहत, कंप्यूटर के रिसोर्सेस जैसे कि CPU, मेमोरी और पेरिफेरल डिवाइसेस आवंटित किए जाते हैं ताकि सभी उपयोगकर्ता उन्हें उपयोग कर सकें।

क्या विंडोज एक टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम है?

जी हा दोस्तों विंडोज एक टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम है यह एक टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का उदहारण है.

टाइम शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम का उदहारण

विंडोज, यूनिक्स, लिनक्स, मल्टिक्स आदि हैं।

टाइम शेयरिंग सिस्टम कैसे काम करता है?

टाइम शेयरिंग सिस्टम की मदद से यूजर एक समय में एक से अधिक कार्य कर सकते हैं इसमें प्रत्येक कार्य को करने के लिए बराबर का समय मिलता है. इस सिस्टम में एक साथ एक से अधिक CPU कार्य करते हैं.

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